सर्दियों में मुंह ढककर सोना पड़ सकता है भारी, ऑक्सीजन की कमी और संक्रमण का बढ़ता है खतरा

सर्दियों में मुंह ढककर सोना पड़ सकता है भारी, ऑक्सीजन की कमी और संक्रमण का बढ़ता है खतरा

02 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Health Desk:  सर्दियों में कई लोग ठंड से बचने के लिए मुंह और नाक ढककर सोना पसंद करते हैं, लेकिन यह आदत सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है। इससे ऑक्सीजन की कमी, कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ना, एलर्जी व संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, खासकर छोटे बच्चों में। जानें, ठंड में सुरक्षित नींद के लिए सही तरीका क्या है।

सर्दी बढ़ने के साथ ही लोग अक्सर गर्माहट पाने के लिए कंबल या रजाई को सिर तक खींचकर सो जाते हैं। यह तरीका शुरुआत में आरामदायक जरूर लगता है, लेकिन सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि मुंह ढककर सोने से ताजी हवा फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाती, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती।

जब आप कंबल के अंदर सांस लेते हैं, तो बाहर छोड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड उसी स्थान में भरती जाती है और अगली सांस में वही हवा शरीर में वापस चली जाती है। इससे ऑक्सीजन का स्तर कम और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ने लगता है, जो मस्तिष्क और हृदय पर दबाव डालता है। इसी वजह से कई लोगों को सुबह उठते समय सिरदर्द, थकान, चक्कर या मुंह सूखने जैसी समस्याएं होती हैं। छोटे बच्चों में यह स्थिति और अधिक खतरनाक हो सकती है।

ऑक्सीजन की कमी और CO₂ बढ़ने का खतरा
कंबल के भीतर हवा का प्रवाह बंद हो जाता है। इससे निकलती सांस का कार्बन डाइऑक्साइड अंदर ही फंसा रहता है और व्यक्ति दोबारा उसी हवा को इनहेल करता है।
लंबे समय तक इस प्रक्रिया के चलते:
शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है
सिरदर्द और थकान बढ़ती है
नींद की गुणवत्ता खराब होती है
हृदय और दिमाग पर अतिरिक्त दबाव बनता है
12 साल से कम उम्र के बच्चों को इससे विशेष खतरा होता है, क्योंकि उनका श्वसन तंत्र अधिक संवेदनशील होता है।
संक्रमण और एलर्जी का खतरा
मुंह से निकलने वाली नमी कंबल के भीतर गर्म और नम वातावरण तैयार करती है, जो फफूंदी, धूल-कीटाणु और एलर्जी कारकों के तेजी से बढ़ने के लिए आदर्श जगह बन जाती है।
ऐसी हवा में सोने से:

सांस से संबंधित एलर्जी
खांसी, जुकाम
फेफड़ों में संक्रमण
का खतरा बढ़ जाता है।

नींद की गुणवत्ता और हृदय पर असर
ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर दिमाग पूरी रात सक्रिय रहता है और गहरी नींद नहीं आती। इसकी वजह से अगले दिन सुस्ती, कमजोरी और आलस महसूस होता है।

इसके अलावा, ज्यादा मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड शरीर की रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालती है, जिससे:
ब्लड प्रेशर अस्थिर हो सकता है
हृदय गति प्रभावित हो सकती है
दिल से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं
ठंड में सोने का सही तरीका
मुंह और नाक न ढकें, कंबल सिर्फ गर्दन तक रखें
गर्म मोजे, स्वेटर या टोपी पहनकर सोएं
कमरे को सोने से पहले हीटर से गर्म करें, लेकिन सोते समय हीटर बंद रखें
बिस्तर को सूखा और साफ रखें
छोटे बच्चों को कभी भी मुंह ढककर न सुलाएं
नोट:
यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्टों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है।