01 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Punjab Desk: 2025 की भीषण बाढ़ ने पंजाब को भारी नुकसान पहुंचाया था। लाखों एकड़ फसल नष्ट हुई, सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए और हजारों परिवार बेघर हो गए। संकट की उसी घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब पहुंचे, हवाई सर्वे किया और राहत के लिए 1600 करोड़ रुपये की विशेष सहायता देने का सार्वजनिक ऐलान किया। लोगों को उम्मीद जगी थी कि केंद्र सरकार राज्य के साथ खड़ी होगी।
लेकिन कई महीनों बाद भी हालात उलटे ही दिखाई दे रहे हैं। पंजाब सरकार के मुताबिक, घोषित 1600 करोड़ की राशि में से अभी तक एक रुपया भी राज्य के खाते में नहीं आया। न कोई आधिकारिक पत्र जारी हुआ, न कोई किस्त ट्रांसफर हुई। प्रधानमंत्री का घोषणा मंच और मीडिया तक सिमटकर रह गया, जबकि पंजाब अब भी बाढ़ के जख्म झेल रहा है।
राज्य सरकार लगातार केंद्र को पत्र भेजती रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को कई बार लिखित अनुरोध भेजे, मीटिंग मांगी, रिमाइंडर भेजे। पर हर बार जवाब मिला—“विचाराधीन”, “प्रक्रिया जारी है।” प्रक्रिया हालांकि अब तक अटकी हुई है, जबकि बाढ़ से हुई सैकड़ों मौतें और अरबों के नुकसान का दर्द जस का तस है।
इसके उलट, बिहार, असम और गुजरात जैसे राज्यों में बाढ़ आते ही केंद्र सरकार तत्काल राहत पैकेज जारी कर देती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा-शासित राज्यों को न केवल त्वरित सहायता मिलती है बल्कि कई बार उनके लिए राशि बढ़ाई भी जाती है। वहीं पंजाब—जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है—अब तक राहत से वंचित है, जिससे केंद्र पर भेदभाव के आरोप और मजबूत हो गए हैं।
केंद्र सरकार के मंत्री कभी 411 करोड़, कभी 480 करोड़ तो कभी 800 करोड़ जारी करने का दावा कर चुके हैं, लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि उसके खजाने में अब तक एक भी रुपया नहीं पहुंचा। सरकारी रिकॉर्ड और आरटीआई दस्तावेजों में भी 1600 करोड़ की घोषित सहायता का कोई ट्रेस नहीं है। पंजाब इसे सिर्फ़ राजनीतिक उपेक्षा नहीं, बल्कि राज्य के साथ विश्वासघात बता रहा है।
पंजाब ने दशकों तक देश को अनाज, जवान और सीमा सुरक्षा दी है। लेकिन जब राज्य मुश्किल में है, तो उसे नजरअंदाज किया जा रहा है—ऐसा आरोप विपक्ष से लेकर आम जनता तक में गूंज रहा है।
पंजाब में यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक रंग ले रहा है और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र–राज्य संबंधों का बड़ा सवाल बन सकता है। पंजाब की जनता सब देख रही है—और जैसा कहा जाता है, “पंजाब ना भूलता है, ना माफ़ करता है।”













