25 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Rashifal Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज हरियाणा के कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण के पवित्र शंख, पांचजन्य, का उद्घाटन करेंगे। इस शंख की ध्वनि महाभारत के युद्ध में कौरवों को थर्रा देती थी और कुरुक्षेत्र का मैदान भी कांप उठता था।
कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा पूरी होने पर गुरु ने अपनी पुत्री को दक्षिणा में मांग लिया। उनका पुत्र समुद्र में डूब गया था, जिसे शंखासुर नामक राक्षस ने निगल लिया था। श्रीकृष्ण ने गुरु को वचन दिया कि वे उनका पुत्र लौटाएंगे।
भगवान कृष्ण और बलराम समुद्र में उतरकर शंखासुर से कहां कि उनके गुरु का पुत्र लौटा दो। राक्षस ने युद्ध किया और पराजित हुआ। इसके शरीर से उत्पन्न हुआ शंख ही पांचजन्य था। इस शंख को भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पास रखा। यमलोक जाते समय यमराज उनके क्रोध से भयभीत हुए और गुरु के पुत्र की आत्मा को धरती पर लौटा दिया। गुरु सांदीपनि को पुत्र और शंख भेंट किए गए, लेकिन उन्होंने शंख श्रीकृष्ण को लौटा दिया।
पांचजन्य शंख की खासियत
पांचजन्य शंख की ध्वनि कई किलोमीटर दूर तक जाती थी। कहा जाता है कि इसका शंखनाद 1000 शेरों की गर्जना के बराबर था। महाभारत युद्ध के दौरान कृष्ण ने 18 दिन तक इसी शंख का प्रयोग किया। युद्ध की शुरुआत और समाप्ति के समय इसका शंखनाद सुनाई देता था। सुबह के शंखनाद से पांडव उत्साहित होते थे, जबकि कौरव भयभीत हो जाते थे। इसके अलावा, पांचजन्य शंख विजय, समृद्धि और सुख का प्रतीक भी माना जाता है।













