25 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Health Desk: बिहार के कुछ जिलों में की गई एक स्टडी के बाद ब्रेस्टमिल्क में यूरेनियम (U-238) पाए जाने की खबर ने लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है। यह स्टडी भोजपुर, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और नालंदा जैसे उन जिलों में की गई थी, जहां पहले भी भूजल में यूरेनियम की मौजूदगी रिपोर्ट की जा चुकी है। अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच किए गए इस शोध में 17 से 35 साल की 40 माताओं के दूध के सैंपल लिए गए और सभी में कम मात्रा में यूरेनियम पाया गया। सबसे ज्यादा औसत स्तर खगड़िया में और सबसे ज्यादा व्यक्तिगत स्तर कटिहार में मिला।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह सवाल उठा कि क्या मां का दूध बच्चों के लिए असुरक्षित है? हालांकि दिल्ली एम्स के बायोकेमिस्ट्री विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक शर्मा ने स्पष्ट किया कि पाए गए स्तर बेहद कम हैं और इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। उनके अनुसार, यूरेनियम ज्यादा मात्रा में शरीर में जाए तो बच्चों की याददाश्त, आईक्यू, फिजिकल ग्रोथ और किडनी पर असर डाल सकता है। लंबे समय तक ज्यादा एक्सपोज़र कैंसर के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। लेकिन इस स्टडी में जो मात्रा मिली है, वह WHO के मानकों से काफी कम है—WHO का सुरक्षित स्तर 30 माइक्रोग्राम/लीटर है, जबकि स्टडी में पाया स्तर 0 से 5.25 माइक्रोग्राम/लीटर के बीच था।
डॉ. शर्मा ने कहा कि यूरेनियम एक प्राकृतिक रेडियोधर्मी तत्व है, जो मिट्टी, चट्टानों और पानी में स्वाभाविक रूप से मौजूद रहता है। शरीर में जाने के बाद इसका बड़ा हिस्सा यूरिन के जरिए बाहर निकल जाता है, यही वजह है कि इस स्टडी के आधार पर माताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। स्तनपान बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित और सर्वोत्तम पोषण का स्रोत है और इसे जारी रखना चाहिए।
उन्होंने आगे बताया कि सरकार जल गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार काम कर रही है, खासकर जल शक्ति मिशन के तहत घर-घर साफ पेयजल पहुंचाने का प्रयास जारी है ताकि हैवी मेटल वाली पानी की समस्या कम हो सके। स्टडी का उद्देश्य भी लोगों को जागरूक करना और नीति-निर्माताओं को बेहतर कदम उठाने में मदद करना है।
यूरेनियम से बचाव के लिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर किसी क्षेत्र के भूजल में इसकी मात्रा पाई जाती है, तो उस पानी का सेवन बंद कर सरकारी शुद्ध जल का उपयोग किया जाए। साथ ही, साफ-सफाई का ध्यान रखें और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहें, ताकि किसी समस्या का पता समय रहते लगाया और रोका जा सके।













