पतंजलि किसान समृद्धि कार्यक्रम: कैसे बदल रहा है भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का चेहरा

पतंजलि किसान समृद्धि कार्यक्रम: कैसे बदल रहा है भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का चेहरा

24 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Health Desk:  कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है, और किसानों की समृद्धि सीधे ग्रामीण विकास और देश की प्रगति को प्रभावित करती है। किसानों के उत्थान और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पतंजलि योगपीठ ने पतंजलि किसान समृद्धि कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम पारंपरिक कृषि को सशक्त बनाने, उत्पादकता बढ़ाने और वैज्ञानिक पद्धतियों के साथ किसानों को प्रशिक्षित करने पर केंद्रित है। इसमें प्राचीन भारतीय खेती के ज्ञान को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य, बेहतर उपज और किसानों की आय में वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यप्रणाली और मुख्य पहलें
1. प्रशिक्षण और कौशल विकास
पतनंजलि किसानों को नियमित वर्कशॉप, ऑन-फील्ड डेमो और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित करता है। इसमें शामिल हैं:
जैविक खेती की तकनीक
प्राकृतिक उर्वरकों का उपयोग
जल संरक्षण
बीज गुणवत्ता सुधार
फसल सुरक्षा
किसानों को पर्यावरण-अनुकूल कृषि उत्पादों का उपयोग करना सिखाया जाता है ताकि फसलें रसायन-मुक्त और पोषक बनी रहें।
2. ऑर्गैनिक इनपुट्स को बढ़ावा
कार्यक्रम जैविक खाद, जैव उर्वरक, हर्बल कीटनाशक और गौ-आधारित इनपुट्स (गोबर, गौमूत्र) को अपनाने पर बल देता है। इससे रसायनों पर निर्भरता घटती है और मिट्टी की उर्वरता बेहतर होती है।
3. सप्लाई चेन को मजबूती
किसानों को उचित मूल्य, प्रत्यक्ष खरीद व्यवस्था और सप्लाई चेन समर्थन प्रदान किया जाता है। पतंजलि किसानों की उपज सीधे प्रोसेसिंग यूनिट्स तक पहुंचाने में मदद करता है, जिससे बिचौलियों की भूमिका घटती है और लाभ बढ़ता है।
4. तकनीक का समावेश
किसानों को ड्रिप सिंचाई, मृदा परीक्षण, जैविक प्रमाणन प्रक्रियाएं और प्राकृतिक कृषि उपकरणों के उपयोग से परिचित कराया जाता है।

कार्यक्रम का विस्तार
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में सक्रिय
हज़ारों किसान पतंजलि किसान सेवा केंद्रों से जुड़े
खाद्यान्न, सब्ज़ियों, औषधीय पौधों और हर्बल खेती जैसे विविध कृषि क्षेत्र शामिल
यह कार्यक्रम छोटे और सीमांत किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

कार्यान्वयन की चुनौतियाँ
बदलाव का विरोध: रसायन-आधारित खेती से जैविक खेती की ओर बदलाव में हिचकिचाहट
जागरूकता की कमी: जैविक खेती के फायदों की सीमित जानकारी
इन्फ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतें: सिंचाई, स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट की कमी
प्रमाणन में देरी: जैविक सर्टिफिकेशन की लंबी प्रक्रिया
पतनंजलि इन चुनौतियों को निरंतर प्रशिक्षण, समर्थन और सरल मॉडल के माध्यम से हल कर रहा है।

दिखा सकारात्मक असर
उचित मूल्य और कम इनपुट लागत से किसानों की आय में बढ़ोतरी
जैविक तरीकों से मिट्टी की सेहत में सुधार
उपभोक्ताओं तक स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों की पहुंच
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर
पारंपरिक भारतीय कृषि पद्धतियों का पुनर्जीवन
निष्कर्ष
पतंजलि किसान समृद्धि कार्यक्रम ने किसानों को सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से सशक्त बनाया है। यह पहल भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।