24 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हालिया बयान ने पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। एक सिंधी समुदाय के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि “भले ही आज सिंध की जमीन भारत का हिस्सा न हो, लेकिन सभ्यता की दृष्टि से सिंध हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है। सीमाएं बदलती रहती हैं, कौन जानता है—कल सिंध फिर से भारत का हिस्सा बन जाए।”
इस बयान को पाकिस्तान ने तुरंत खारिज कर दिया और इसे “विस्तारवादी सोच” बताया, जबकि भारत के सिंधी समाज और सिंध के कुछ नेताओं ने इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक बताया।
भारत का सिंध पर दावा किस आधार पर?
1. ऐतिहासिक-सभ्यतागत जुड़ाव
राजनाथ सिंह ने कहा कि सिंध का भारत से संबंध हजारों वर्षों पुराना है।
ऋग्वेद में सिंधु नदी का कई बार उल्लेख मिलता है।
महाभारत में सिंधु प्रदेश के राजा जयद्रथ की कथा इसका सांस्कृतिक महत्व दिखाती है।
सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा-मोहनजोदड़ो) को दुनिया इंडस सिविलाइजेशन के नाम से जानती है—यह वही ‘इंडस’ है, जिससे भारत का अंग्रेजी नाम ‘India’ आया है।
2. सांस्कृतिक और भाषाई पहचान
सिंधी भाषा, लोकगीत, परंपराएं और साहित्य—सबका गहरा संबंध भारत, विशेषकर गुजरात और राजस्थान की संस्कृति से है।
2005 में राष्ट्रगान से ‘सिंध’ शब्द हटाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सिंध शब्द सिर्फ भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।
3. सिंधी समुदाय का भारत से भावनात्मक जुड़ाव
विभाजन के बाद 15 लाख से अधिक सिंधी हिंदू भारत आए, जिन्होंने यहां शून्य से शुरुआत कर समाज, व्यापार और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारतीय नेतृत्व ने भी हमेशा सिंधी समाज का समर्थन किया—अटल बिहारी वाजपेयी ने 1957 में सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए गैर-सरकारी विधेयक पेश किया था।
सिंध के लिए भारत की ‘नैतिक जिम्मेदारी’?
राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान में सिंधी लोगों पर
जल संसाधनों पर नियंत्रण
सांस्कृतिक दमन
राजनीतिक उपेक्षा
जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत सांस्कृतिक और मानवाधिकार स्तर पर सिंधी समाज का साथ देने के लिए “नैतिक रूप से बाध्य” है।
पाकिस्तान की तीखी प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस बयान को “क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा” बताया और भारत पर राजनीतिक मंशा का आरोप लगाया।
दूसरी ओर सिंध के एक प्रमुख नेता ने कहा कि “सिंधी लोग हमेशा भारत की ओर सांस्कृतिक आकर्षण महसूस करते आए हैं।”
क्या यह आंतरिक राजनीति का हिस्सा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान भारतीय राजनीति में सिंधी समुदाय को मजबूत संदेश देने का प्रयास हो सकता है। इसके साथ ही यह भारत की सॉफ्ट पावर रणनीति, यानी सांस्कृतिक रिश्तों के माध्यम से प्रभाव बढ़ाने की कोशिश का संकेत भी देता है।
कूटनीतिक असर
सिंध पाकिस्तान का आर्थिक केंद्र है। ऐसे बयानों से भारत-पाकिस्तान के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है और क्षेत्रीय समीकरणों पर प्रभाव पड़ सकता है।













