दिल्ली में प्रदूषण विरोध प्रदर्शन में नक्सली हिडमा के समर्थन में नारे: राजनीति गरमाई, पुलिस करेगी कार्रवाई

दिल्ली में प्रदूषण विरोध प्रदर्शन में नक्सली हिडमा के समर्थन में नारे: राजनीति गरमाई, पुलिस करेगी कार्रवाई

24 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk: दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के खिलाफ रविवार शाम इंडिया गेट पर हुआ प्रदर्शन अचानक विवादों में आ गया, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने माओवादी कमांडर हिडमा के समर्थन में नारे लगाए और उसके पोस्टर भी लहराए। हवा की गुणवत्ता को लेकर लोगों का गुस्सा व्यक्त करने वाले इस प्रदर्शन ने राजनीतिक बहस को नई दिशा दे दी है।
राजधानी में इस समय ज्यादातर इलाकों में AQI ‘बेहद खराब’ श्रेणी में है, जिससे आम लोग और सामाजिक संगठनों के बीच चिंता बढ़ी हुई है। लेकिन नक्सली समर्थन वाले पोस्टरों और नारेबाजी ने विरोध की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इंडिया गेट पर हिडमा के समर्थन में नारे, पुलिस सतर्क
प्रदर्शन के दौरान कई लोगों ने हाल ही में मुठभेड़ में मारे गए माओवादी कमांडर माडवी हिडमा की तस्वीरों वाले पोस्टर उठाए हुए थे। “हिडमा अमर रहे” जैसे नारे सुनने के बाद पुलिस हरकत में आ गई है और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की तैयारी की बात कही है।
हिडमा पर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का इनाम था और वह सुरक्षा बलों पर कई हमलों में शामिल रहा है। 18 नवंबर को छत्तीसगढ़–आंध्रप्रदेश बॉर्डर पर हुए एनकाउंटर में हिडमा और उसकी पत्नी मारे गए थे। हिडमा पर करीब 350 लोगों की हत्या का आरोप है, जिनमें बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों के जवान शामिल हैं।
बीजेपी ने कहा– यह ‘अर्बन नक्सल एजेंडा’, पर्यावरण चिंता नहीं
प्रदर्शन ने राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने इस विरोध को “अर्बन नक्सली एजेंडा” बताते हुए कहा कि यह प्रदर्शन पर्यावरण चिंता से प्रेरित नहीं, बल्कि एक “कम्युनिस्ट एजेंडे” का हिस्सा है।

मालवीय ने दावा किया कि:
इस साल दिल्ली की हवा पिछले 10 वर्षों की तुलना में बेहतर रही है।
केंद्र की सख्ती से पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है।
इसके बावजूद पंजाब—जहां AAP सरकार है—प्रदूषण का बड़ा स्रोत बना हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल चेहरे वही “जेएनयू के लेफ्ट-अलाइंड एक्टिविस्ट” हैं, जो लंबे समय से राजनीति से प्रेरित आंदोलन करते आए हैं।
“कानून चलेगा तो फिर दमन का शोर मचाएँगे”—मालवीय
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ नक्सली हिडमा के समर्थन में नारे लगाए, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर मिर्च स्प्रे का भी प्रयोग किया।
उन्होंने कहा कि जब कानून कार्रवाई करेगा, तो यही लोग “दमन-दमन” का आरोप लगाएँगे। मालवीय ने दावा किया कि 31 मार्च 2026 के बाद नक्सलवाद का अंत होगा और इसके बाद देश को “अर्बन नक्सलों” पर ध्यान देना होगा।

विरोध की मंशा पर उठे सवाल
वायु प्रदूषण को लेकर बढ़ती चिंता के बीच इस तरह की नारेबाजी ने पूरे आंदोलन की दिशा बदल दी है। सवाल यह उठ रहा है कि यह प्रदर्शन केवल खराब हवा के खिलाफ था या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक और वैचारिक एजेंडा छिपा था।