विलुप्त होती लोक संस्कृति को नया जीवन दे रहा अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव, ब्रह्मसरोवर पर सजा ‘लघु भारत’

विलुप्त होती लोक संस्कृति को नया जीवन दे रहा अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव, ब्रह्मसरोवर पर सजा ‘लघु भारत’

20 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Haryana Desk: अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव कुरुक्षेत्र के पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर देश की विलुप्त हो रही लोक संस्कृति और शिल्प कला को फिर से जीवंत कर रहा है। सरस और शिल्प मेले में देशभर से आए शिल्पकारों की अनोखी कारीगरी ने पूरा ब्रह्मसरोवर रंग-बिरंगी कलाओं से सजा दिया है। पर्यटक कलाकारों की प्रस्तुतियों और शिल्पकारों की दुर्लभ कला देखकर अभिभूत हैं।

मेले में उत्तराखंड का छपेली, पंजाब का गटका, हिमाचल का गद्दी नाटी, राजस्थान के बहरुपिए व लहंगा नृत्य, पंजाब के बाजीगर—इन सबकी धुनों से घाट दिनभर गूंजते रहे। सुबह से शाम तक ब्रह्मसरोवर ‘लघु भारत’ की झलक पेश करता नजर आया, जहां कलाकार और पर्यटक साथ झूमते और यादें संजोते दिखे।

कलाकारों ने बताया कि बदलते दौर में लोक कला को बचाए रखना बड़ी चुनौती बन चुका है, लेकिन गीता महोत्सव जैसे बड़े मंच इस कला को देश-विदेश तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

बांस, लकड़ी और अन्य प्राकृतिक सामग्री से बने फ्लावर पॉट, वॉल हैंगिंग, टेबल लैम्प, फ्रूट बास्केट, सजावटी सामान और बांस की पानी की बोतल जैसे आकर्षक क्राफ्ट आइटम मेले की शोभा बढ़ा रहे हैं। असम, जम्मू, पंजाब और अन्य राज्यों से आए शिल्पकारों ने कहा कि यहां अपनी कला प्रदर्शित करना एक अद्भुत अनुभव है, जिसे हर पर्यटक फोन में कैद कर रहा है।

महोत्सव में लोक कला, नृत्य, संगीत और हस्तशिल्प का अनोखा संगम न सिर्फ पर्यटकों को रोमांचित कर रहा है, बल्कि देश की पुरानी सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करने का बड़ा मंच भी साबित हो रहा है।