दफ़्तर जिला लोक संपर्क अधिकारी बटाला। कृषि विभाग ने किसानों को डी.ए.पी. खाद के विकल्प सुझाए
बटाला, 29 सितंबर 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Himachal Desk: गेहूँ की फसल की बुवाई के समय फास्फोरस तत्व की आवश्यकता होती है, जिसकी पूर्ति किसान सामान्यत: डी.ए.पी. खाद से करते हैं। लेकिन अब बाजार में डी.ए.पी. के कई विकल्प उपलब्ध हैं। इसी संदर्भ में कृषि और किसान कल्याण विभाग ने आगामी गेहूँ की फसल के लिए डी.ए.पी. के स्थान पर अन्य फास्फोरस युक्त खादों के उपयोग की सिफारिश की है।
मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. अमरीक सिंह ने बताया कि डी.ए.पी. सबसे अधिक फास्फोरस वाली खाद है, जिसे धान-गेहूँ फसल चक्र में प्रयोग किया जाता है। इसमें 46% फास्फोरस और 18% नाइट्रोजन होता है। उन्होंने कहा कि इसके विकल्प के रूप में एन.पी.के. (12:32:16) खाद का प्रयोग किया जा सकता है, जिसमें 32% फास्फोरस, 12% नाइट्रोजन और 16% पोटाश होता है। एक बोरी डी.ए.पी. के बदले डेढ़ बोरी एन.पी.के. (12:32:16) दी जा सकती है।
उन्होंने बताया कि डी.ए.पी. के तीसरे विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फॉस्फेट (एस.एस.पी.) का प्रयोग किया जा सकता है। इसमें 16% फास्फोरस होता है और इसके 3 बोरे देने से न केवल फास्फोरस मिलता है बल्कि गेहूँ की फसल को 18 किलो सल्फर भी प्राप्त होता है।
डॉ. सिंह ने बताया कि अब बाजार में ट्रिपल सुपर फॉस्फेट भी उपलब्ध है। इसमें डी.ए.पी. के बराबर 46% फास्फोरस होता है। यह एक नई उच्च फास्फोरस खाद है और किसान पहली बार इसका प्रयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एन.पी.के. (12:32:16) डी.ए.पी. का सबसे अच्छा विकल्प है, क्योंकि इसका डेढ़ बोरा लगभग उतनी ही फास्फोरस और नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है जितनी डी.ए.पी. और इसके साथ 23 किलो पोटाश भी देता है।
उन्होंने कहा कि डी.ए.पी. के अन्य विकल्पों में एन.पी.के. (10:26:26) या अन्य खादें भी इस्तेमाल की जा सकती हैं। यदि फास्फोरस की पूर्ति के लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट या ट्रिपल सुपर फॉस्फेट का प्रयोग किया जाए तो बुवाई के समय 20 किलो यूरिया प्रति एकड़ डालना चाहिए।
डॉ. सिंह ने कहा कि जिन खेतों की मिट्टी में जैविक कार्बन कम है और फास्फोरस का स्तर अधिक (19–20 किलो/एकड़) है, वहां फास्फोरस की मात्रा 25% तक घटाई जा सकती है। वहीं, मध्यम कार्बन मात्रा (0.4–0.75%) वाली जमीन में यदि फास्फोरस 5–20 किलो/एकड़ है तो फास्फोरस की मात्रा में 50% तक कटौती की जा सकती है।
धान-गेहूँ फसल चक्र में यदि धान की फसल के समय पोल्ट्री खाद (2.5 टन/एकड़) या सुखा गोबर गैस प्लांट का स्लरी (2.5 टन/एकड़) अंतिम जुताई से पहले खेत में डाल दी जाए तो फास्फोरस की जरूरत आधी रह जाती है। इसी प्रकार 1 किलो फास्फोरस प्रति टन अच्छी तरह सड़ी हुई खाद के हिसाब से फास्फोरस की खाद घटाई जा सकती है। गेहूँ की बुवाई से पहले धान की फक्क (पराली) की राख या गन्ने की गूदी की राख (4 टन/एकड़) डालने से भी फास्फोरस की मात्रा आधी की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि जिन खेतों में लगातार धान की पराली मिट्टी में मिलाई जाती है, वहां जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ जाती है और फास्फोरस की खाद को 50% तक कम किया जा सकता है।













