तरनतारन, 29 सितंबर 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Punjab Desk: पराली को खेतों में दबाने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है – क्लस्टर अधिकारी यादविंदर सिंह डायरेक्टर कृषि डॉ. जसवंत सिंह के आदेशों के तहत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तरनतारन की ओर से किसानों को धान की पराली जलाने की बजाय उसके उचित प्रबंधन संबंधी जानकारी देने के लिए गाँव नागोके स्थित गुरुद्वारा बेर साहिब में किसान प्रशिक्षण एवं जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर का आयोजन डिप्टी कमिश्नर तरनतारन श्री राहुल (IAS) के निर्देशों अनुसार, मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. तेजबीर सिंह की अध्यक्षता और नोडल इंचार्ज डॉ. नवतेज सिंह तथा क्लस्टर अधिकारी डॉ. यादविंदर सिंह (खडूर साहिब) की अगुवाई में किया गया।
इस अवसर पर डॉ. यादविंदर सिंह ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि पराली को आग लगाने से मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं और जमीन की उपजाऊ क्षमता घटती है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ सड़क हादसे भी होते हैं। उन्होंने बताया कि जिन किसानों को आलू और मटर की बुआई करनी है, वे बेलर मशीन से पराली की गांठें बना सकते हैं या फिर धान की कटाई के बाद मल्चर और रिवर्सिबल प्लाउ की मदद से पराली को मिट्टी में दबा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पराली को जलाने से नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर, पोटाश और जैविक पदार्थ जैसे आवश्यक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिसके कारण बाद में रासायनिक खादों का उपयोग करना पड़ता है और खेती का खर्च बढ़ जाता है। एक एकड़ पराली को जलाने से लगभग 3,000 रुपये का नुकसान होता है। वहीं 10 क्विंटल (एक टन) पराली जलाने से 400 किलो जैविक पदार्थ, 5.5 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फास्फोरस, 25 किलो पोटाश और 1.2 किलो सल्फर का नुकसान हो जाता है।
इस मौके पर पंचायत सचिव किरणदीप सिंह, राजबीर सिंह, रमिंदर सिंह, अमरजीत सिंह, गुरमीत सिंह, हरद्याल सिंह और अन्य प्रगतिशील किसान उपस्थित थे।













