28 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Health Desk: छोटे बच्चों में डिहाइड्रेशन का बढ़ा खतरा: पहचानें लक्षण और अपनाएं बचाव के उपाय छोटे बच्चों, खासकर 1 साल से कम उम्र के शिशुओं में डिहाइड्रेशन (पानी और जरूरी तरल पदार्थ की कमी) का खतरा अधिक होता है। इस उम्र में उनका शरीर तेजी से पानी और मिनरल्स खो देता है और इम्यून सिस्टम भी कमजोर रहता है। समय पर ध्यान न देने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है और बच्चे के स्वास्थ्य व विकास पर असर डाल सकती है।
क्यों होता है डिहाइड्रेशन? बार-बार दस्त या उल्टी होना तेज बुखार आना पर्याप्त दूध या पानी न मिलना
गर्म मौसम या संक्रमण
ये स्थितियां बच्चों के शरीर से तेजी से तरल पदार्थ बाहर निकाल देती हैं, जिससे डिहाइड्रेशन हो जाता है।
क्या होता है असर? जब शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी होती है, तो खून गाढ़ा हो जाता है और ऑक्सीजन व पोषण अंगों तक सही ढंग से नहीं पहुंच पाते। शिशु कमजोर होने लगता है, बार-बार रोता है और गंभीर स्थिति में डिहाइड्रेशन किडनी और दिमागी विकास पर भी असर डाल सकता है। इलाज में देरी होने पर यह जानलेवा भी हो सकता है।
शिशुओं में डिहाइड्रेशन के लक्षण बच्चे का बार-बार रोना और चिड़चिड़ापन मुंह और होंठ का सूखना रोने पर आंसू न आना लंबे समय तक डायपर का सूखा रहना सिर पर मौजूद सॉफ्ट स्पॉट का धंसना त्वचा का ढीला या सूखा होना, आंखों का धंस जाना दूध पीने से इंकार करना, कमजोरी या सुस्ती दिखाना तेज बुखार या लगातार दस्त इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
बचाव के तरीके शिशु को बार-बार ब्रेस्टफीडिंग कराएं। गर्म मौसम में बच्चे को हल्के और आरामदायक कपड़े पहनाएं। दस्त या उल्टी की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
बच्चे को साफ-सुथरा वातावरण दें। ब्रेस्टफीडिंग न करने वाले शिशुओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार फॉर्मूला मिल्क दें। कमजोरी या सुस्ती के संकेत दिखने पर देरी न करें और डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
👉 नोट: शिशुओं में डिहाइड्रेशन को कभी भी हल्के में न लें। शुरुआती लक्षण पहचानना और समय पर इलाज कराना बच्चे की जान बचा सकता है।