25 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: एक्सिओम-4 मिशन: अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने साझा किए रोमांचक अनुभव भारतीय अंतरिक्ष यात्री और वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपने 20 दिन लंबे एक्सिओम-4 मिशन और उससे जुड़ी तैयारियों का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में जाने से पहले उन्हें कठोर प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा, जिसमें कृत्रिम वातावरण में जीवित रहने की तैयारी, मेडिकल और इंजीनियरिंग कौशल, फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी और टीम भावना को मजबूत करने के लिए मैक्सिको में कायकिंग जैसी गतिविधियां शामिल थीं। शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष में रहना बिल्कुल नए घर में रहने जैसा है—जहां खाने, सोने से लेकर वॉशरूम तक के अपने अलग नियम होते हैं। उन्होंने इसे सबसे कठिन चुनौती बताया।
मिशन लॉन्च और अनुभव 25 जून को अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर से ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट लॉन्च हुआ था, जिसमें शुक्ला मिशन पायलट के रूप में सवार थे। उन्होंने बताया कि 0 से 28,500 किमी/घंटा की रफ्तार तक सिर्फ 8.5 मिनट में पहुंचना अविश्वसनीय था। 15 जुलाई को धरती पर लौटने तक यह अनुभव बेहद रोमांचकारी रहा।
अंतरिक्ष में प्रयोग मिशन के दौरान शुक्ला ने भारत की ओर से तैयार सात माइक्रोग्रैविटी प्रयोग पूरे किए, जिनमें जीवन विज्ञान, कृषि और बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े अध्ययन शामिल थे। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष से भारत का नजारा बेहद खूबसूरत लगता है, खासकर रात के समय।
बचपन का सपना पूरा लखनऊ में जन्मे शुक्ला बचपन में राकेश शर्मा की कहानियां सुनकर बड़े हुए थे। 2006 में भारतीय वायुसेना में शामिल होकर उन्होंने 2,000 घंटे से अधिक समय विभिन्न लड़ाकू विमानों पर उड़ान भरते हुए पूरे किए। अब अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बनकर उन्होंने इतिहास रच दिया।
टीम वर्क और सीख शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष यात्रा अकेले संभव नहीं है, इसके लिए मजबूत टीम वर्क जरूरी है। उन्होंने कहा, “अगर आप टीम प्लेयर नहीं हैं तो आप अंतरिक्ष में उड़ान के लायक नहीं हैं।”
👉 उन्होंने बच्चों और युवाओं को संदेश दिया कि भारत का अंतरिक्ष भविष्य उज्ज्वल है और आने वाली पीढ़ी को इसके लिए तैयार रहना चाहिए।












