सोशल मीडिया और मेंटल हेल्थ: क्यों बढ़ रहा है तनाव और डिप्रेशन?

सोशल मीडिया और मेंटल हेल्थ: क्यों बढ़ रहा है तनाव और डिप्रेशन?

19 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Health Desk: आजकल सुबह उठते ही ज्यादातर लोग सबसे पहले मोबाइल उठाते हैं और सोशल मीडिया स्क्रॉल करना शुरू कर देते हैं। इंस्टाग्राम की तस्वीरें, फेसबुक स्टेटस और व्हाट्सऐप मैसेज से दिन की शुरुआत होती है। कुछ साल पहले तक सोशल मीडिया का मकसद लोगों को जोड़ना था, लेकिन अब यह आदत धीरे-धीरे दिमाग़ और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालने लगी है।

दिखावटी लाइफस्टाइल से बढ़ रहा तनाव                                                                              गाजियाबाद जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग के डॉक्टर एके विश्वकर्मा बताते हैं कि सोशल मीडिया पर ज्यादातर लोग अपनी जिंदगी का सिर्फ खूबसूरत हिस्सा ही दिखाते हैं—महंगे ट्रैवल, शानदार फोटो और लग्ज़री लाइफस्टाइल। इन्हें देखकर कई लोग अपनी जिंदगी को कमतर समझने लगते हैं, जिससे तनाव (stress), चिंता (anxiety) और डिप्रेशन तक की स्थिति बन जाती है।

“लाइक्स” की डोपामिन हिट                                                                                                  एक और बड़ी समस्या है “लाइक्स” और “कमेंट्स” की डोपामिन हिट। हर लाइक पर दिमाग़ को थोड़ी-सी खुशी मिलती है और धीरे-धीरे यह एक लत बन जाती है। अगर पोस्ट पर कम लाइक्स मिलें, तो मूड खराब हो जाता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह पैटर्न किसी नशे या शुगर की लत जैसा काम करता है।

नींद और रिश्तों पर असर                                                                                                      मीडिया का सबसे बड़ा असर नींद पर पड़ता है। देर रात तक स्क्रॉल करने से नींद अधूरी रह जाती है और अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान न लगने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर बने वर्चुअल रिश्तों की वजह से लोग असल जिंदगी के रिश्तों से दूर होने लगे हैं। कई बार “फॉलोअर्स” की गिनती को ही दोस्ती और जुड़ाव समझ लिया जाता है, जबकि हकीकत में असली बातचीत और नज़दीकी रिश्ते पीछे छूट जाते हैं।

शोध में भी मिली पुष्टि                                                                                                          पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट में सामने आया कि जो लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल सीमित समय तक करते हैं, उनमें तनाव और डिप्रेशन के लक्षण कम पाए गए। वहीं, जो लोग लगातार स्क्रीन से जुड़े रहते हैं, उनमें मानसिक समस्याएं ज्यादा दिखीं।

क्या है समाधान?                                                                                                              डॉ. एके के मुताबिक सोशल मीडिया को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है, लेकिन इसका इस्तेमाल बैलेंस बनाकर करना बेहद ज़रूरी है। इसके लिए दिन का एक तय समय सोशल मीडिया को दें, बेवजह स्क्रॉलिंग से बचें और सोने से पहले फोन इस्तेमाल करने की आदत छोड़ें। सबसे अहम बात, असली जिंदगी के रिश्तों और दोस्तों के लिए समय निकालें।