Krishna Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण ने 64 दिनों में सीखी थीं 64 कलाएं, जानें क्या थीं ये कलाएं

Krishna Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण ने 64 दिनों में सीखी थीं 64 कलाएं, जानें क्या थीं ये कलाएं

11 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Rashifal Desk: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025: 64 दिनों में सीखी थीं 64 अद्वितीय कलाएं, जानें क्या थीं ये विद्या      इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। यह पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

धर्मशास्त्रों में वर्णित है कि भगवान श्रीकृष्ण 64 कलाओं में निपुण थे, जिनमें संगीत, नृत्य, अभिनय, शिल्प, राजनीति, जादू, पाक कला, कूटनीति और कई अन्य विद्याएं शामिल थीं। आश्चर्यजनक रूप से उन्होंने गुरु संदीपनि के मार्गदर्शन में मात्र 64 दिनों में इन सभी कलाओं का गहन ज्ञान अर्जित कर लिया था। उनके साथ भाई बलराम और सखा सुदामा भी उज्जैन स्थित गुरु संदीपनि के आश्रम में शिक्षा प्राप्त कर रहे थे, जिसे विश्व का सबसे प्राचीन गुरुकुल माना जाता है।

श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कंध के अनुसार, इन कलाओं में नृत्य, वादन, गायन, नाट्य, इंद्रजाल (जादू), लेखन, इत्र एवं आभूषण निर्माण, प्रतीक भाषा, पशु-पक्षियों से संवाद, वृक्षों की चिकित्सा, भवन निर्माण, पाक कला, चित्रकला, काव्य रचना, कूटनीति, बहुभाषा ज्ञान, रत्नों की पहचान, धातु परीक्षण, शिल्प निर्माण, वस्त्र एवं गहनों की डिजाइन, कठपुतली नृत्य, पहेली सुलझाना, हस्तकला, रंगाई-सफाई, रणनीति, ग्रंथ अध्यापन, समस्यापूर्ति, छल-कौशल और शंख-हाथीदांत के आभूषण बनाना जैसी विविध विधाएं शामिल हैं।

इन कलाओं का ज्ञान न केवल उनकी अद्वितीय प्रतिभा का प्रमाण था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वे जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन और उत्कृष्टता के प्रतीक थे। यही कारण है कि श्रीकृष्ण आज भी बहुआयामी व्यक्तित्व और अद्वितीय विद्या के प्रतीक के रूप में पूजे जाते हैं।

अस्वीकरण: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ग्रंथों पर आधारित है। इसकी तथ्यात्मक सटीकता और पूर्णता के लिए उत्तरदायित्व संबंधित स्रोतों का है।