हूती विद्रोहियों ने अल-अक्सा विवाद पर दिखाई नाराज़गी, दागीं 3 मिसाइलें

हूती विद्रोहियों ने अल-अक्सा विवाद पर दिखाई नाराज़गी, दागीं 3 मिसाइलें

04 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

International Desk: अल-अक्सा विवाद के बाद यमन के हूती विद्रोहियों का इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन हमला, तेल अवीव समेत कई इलाकों को बनाया निशाना
यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद में इजराइल के आंतरिक सुरक्षा मंत्री इतेमार बेन ग्वीर की हालिया मौजूदगी से मिडिल ईस्ट में तनाव और गहरा गया है। इस घटनाक्रम के बाद यमन के हूती विद्रोहियों ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इजराइल पर तीन मिसाइलें दागीं और कई ड्रोन हमले भी किए।

हूती विद्रोहियों ने मंत्री की मस्जिद में उपस्थिति को “अपमानजनक” करार देते हुए कहा कि इजराइल अब सभी सीमाओं को लांघ चुका है। हूती प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी के अनुसार, एक मिसाइल जाफा, एक अश्केलोन और एक अन्य फिलिस्तीन के तटीय क्षेत्र की ओर दागी गई। इसके अलावा कुछ ड्रोन हमले भी किए गए, जिनमें से अधिकतर को इजराइली रक्षा प्रणाली ने हवा में ही मार गिराया।

इजराइल की प्रतिक्रिया और सुरक्षा स्थिति
इजराइली मीडिया के अनुसार, मिसाइल हमलों के बाद कई इलाकों में सायरन बजाए गए। अधिकारियों के अनुसार, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हमलों से कितना नुकसान हुआ है, जांच जारी है।

सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील चाणक्यपुरी जैसे क्षेत्रों में भी हाल की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। हालांकि, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस मुद्दे पर अब तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने केवल इतना कहा कि “अल-अक्सा परिसर में यथास्थिति बनी रहेगी” और केवल मुस्लिमों को नमाज़ पढ़ने की अनुमति होगी।

हूती विद्रोहियों की चेतावनी
हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने अपने बयान में कहा, “यमन, मुसलमानों के अपमान पर चुप नहीं रहेगा। हम इजराइल पर तब तक हमले करते रहेंगे जब तक गाजा और वहां के लोगों पर अत्याचार बंद नहीं होता। आने वाले दिनों में हमले और तेज़ होंगे।”

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
सऊदी अरब, जॉर्डन और अन्य मुस्लिम देशों ने इतेमार बेन ग्वीर के अल-अक्सा दौरे की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह इजराइल की ओर से जानबूझकर तनाव भड़काने की कोशिश है।

क्या है अल-अक्सा मस्जिद विवाद?
अल-अक्सा मस्जिद इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। 1967 तक यह जॉर्डन के नियंत्रण में था, लेकिन 6 दिन के युद्ध के दौरान इजराइल ने इसे कब्जे में ले लिया। बाद में एक समझौते के तहत जॉर्डन को इसका धार्मिक संरक्षक घोषित किया गया, जबकि प्रशासनिक नियंत्रण इजराइल के पास है।

यह स्थल यहूदियों के लिए भी पवित्र माना जाता है, जिसे वे “टेंपल माउंट” के नाम से जानते हैं। यहीं से अक्सर तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है।