21 जुलाई 2025 फैक्टर रिकॉर्डर
Chandigarh Desk: चंडीगढ़: बीट बॉक्स में टैक्सी चालक से मारपीट और वसूली का आरोप, पुलिस ने बताया फर्जीवाड़ा चंडीगढ़ में पुलिस की वर्दी में मौजूद कुछ लोगों पर टैक्सी चालक को बीट बॉक्स में ले जाकर मारपीट और वसूली करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित मंजीत नामक टैक्सी चालक ने बताया कि 16 जुलाई की रात वह अपने चाचा के बेटे सुमित कुमार के साथ गुरुद्वारे के पास कार में बैठकर खाना खा रहा था। उसी दौरान दो लोग पुलिस की वर्दी में वहां पहुंचे और शराब पीने का आरोप लगाते हुए उन्हें जबरन खुड्डा लाहौरा स्थित बीट बॉक्स में ले गए।
मंजीत के अनुसार, बीट बॉक्स के अंदर अंधेरे में उसके साथ बुरी तरह मारपीट की गई, उसकी पगड़ी उतार दी गई और छोड़ने के बदले दो हजार रुपये की मांग की गई। लेकिन उनके पास केवल 500 रुपये ही थे, जिसे आरोपियों ने सुमित के फोन से गूगल पे के जरिए ट्रांसफर करवा लिया। मंजीत का दावा है कि जिस स्कैनर से पैसे ट्रांसफर किए गए, उस पर “बीरेंद्र राणा” नाम लिखा था।
पुलिस ने झाड़ा पल्ला, बोले—‘नकली पुलिस वाले होंगे’
मंजीत जब रात करीब 12 बजे सारंगपुर थाने पहुंचा और शिकायत दर्ज कराना चाहा, तो थाने में मौजूद महिला पुलिसकर्मी और अन्य स्टाफ ने आरोप को नकारते हुए कहा कि शायद वे नकली पुलिसकर्मी रहे होंगे। जब मंजीत ने बताया कि घटना बीट बॉक्स के भीतर हुई है, तो पुलिस ने कहा कि हो सकता है किसी ने चाबी की नकली कॉपी बना ली हो, क्योंकि चाबी वहीं आसपास पड़ी रहती है।
सवालों के घेरे में पुलिस की कार्यप्रणाली
इस मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं:
अगर हमलावर असली पुलिसवाले थे, तो मंजीत का मेडिकल क्यों नहीं करवाया गया?
अगर वे नकली थे, तो बीट बॉक्स जैसी संरक्षित जगह की चाबी उनके पास कैसे आई?
जिस स्कैनर पर पैसे ट्रांसफर किए गए, वह किसके नाम रजिस्टर्ड है?
क्या बीट बॉक्स अब वसूली का अड्डा बन चुके हैं?
पुलिस की मौजूदगी में कोई कैसे इस तरह की घटना अंजाम दे सकता है?
मंजीत ने आरोप लगाया कि जब वह पुलिस के सामने अपनी आपबीती सुना रहा था, तो अधिकारी हंसी-मजाक में लगे रहे और गंभीरता से कोई कार्रवाई नहीं की। उसने बीट बॉक्स की जांच और थाने का रजिस्टर दिखाने की मांग भी की, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।
थाना प्रभारी ने दी सफाई
सारंगपुर थाना प्रभारी मिनी भारद्वाज का कहना है कि उनके पास अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने के बाद ही वे कार्रवाई कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर बीट बॉक्स में कोई असली पुलिसवाला शामिल होता, तो वह आरोपियों को सीधे थाने लेकर आता।
पहले भी उठ चुके हैं बीट बॉक्स पर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब चंडीगढ़ के बीट बॉक्सों पर सवाल उठे हैं। अमर उजाला की एक पिछली रिपोर्ट में पाया गया था कि शहर के 90 प्रतिशत बीट बॉक्स खाली पड़े रहते हैं। कई बीट बॉक्सों पर लगे इमरजेंसी नंबर गलत थे और कॉल करने पर कोई जवाब नहीं मिला।
इस ताजा मामले ने एक बार फिर पुलिस चौकियों की निगरानी, पारदर्शिता और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है।












