स्मार्ट सिटी मिशन की कंपनियों को मिलेगा नया दायित्व, बनाएंगी शहरी विकास की योजनाएं

08 जुलाई 2025 फैक्टर रिकॉर्डर

Chandigarh Desk: स्मार्ट सिटी के बाद अब नए मिशन की तैयारी: चंडीगढ़ सहित देशभर में SPV कंपनियों को मिलेगी नई भूमिका, शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं को संभालेंगी

चंडीगढ़ में बीते वर्षों में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत करीब 1400 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न परियोजनाएं पूरी की गईं। अब जबकि ये प्रोजेक्ट्स लगभग पूर्ण हो चुके हैं, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) को 20 मार्च से बंद कर दिया गया है। लेकिन मिशन के अंत के बाद भी इन विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) कंपनियों की उपयोगिता खत्म नहीं हो रही है। केंद्र सरकार चाहती है कि इन कंपनियों का अनुभव और ढांचा अब शहरी विकास के नए कार्यों में इस्तेमाल किया जाए।

नई भूमिका के लिए तैयार रहें SPVs
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बनाई गई SPV कंपनियों को तकनीकी सेवाएं, डेटा प्रबंधन, प्रोजेक्ट संचालन और अन्य शहरी योजनाओं में सक्रिय भूमिका दी जाए। इसके लिए आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने चंडीगढ़ प्रशासन को एक एडवाइजरी जारी की है।

CSCL को बंद करने के बाद अब नए उपयोग की तैयारी
20 मार्च को CSCL के बंद होने के बाद इसके तहत चल रही सभी परियोजनाओं को संबंधित विभागों को ट्रांसफर कर दिया गया है। लेकिन केंद्र सरकार अब चाहती है कि इस कंपनी के ढांचे और अनुभव को नई योजनाओं में दोबारा उपयोग में लाया जाए। इसके लिए कई विकल्प सुझाए गए हैं।

SPV को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास
सरकार का उद्देश्य है कि ये कंपनियां अब ‘सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल’ अपनाएं, जिसमें संचालन के लिए सेंटेज फीस वसूलने का भी सुझाव दिया गया है। इसके लिए राज्य सरकारों से नीति सहयोग की अपील की गई है। साथ ही, SPV को अपनी मानव संसाधन आवश्यकताओं का आकलन कर भविष्य के कार्यों के लिए खुद को तैयार करना होगा।

ICCC को बनाए रखने और अपग्रेड करने के निर्देश
जिन शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किए गए हैं, उनके रखरखाव और समय-समय पर अपडेट की जिम्मेदारी भी अब SPV को दी जा सकती है। इन सेंटरों ने ट्रैफिक नियंत्रण, सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। केंद्र चाहता है कि ये सुविधाएं अब बंद न हों, बल्कि इन्हें और मजबूत किया जाए।

मार्च 2026 तक फंड उपयोग प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य
जिन शहरों में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स अभी भी चल रहे हैं, उन्हें दिसंबर 2025 तक हर हाल में प्रोजेक्ट्स पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, भारत सरकार द्वारा दी गई वित्तीय सहायता का उपयोग प्रमाण पत्र मार्च 2026 तक जमा करना जरूरी होगा। सभी निर्माणों, अनुबंधों और डिजिटल दस्तावेजों का व्यवस्थित रिकॉर्ड बनाए रखने को कहा गया है।

चंडीगढ़ में पूरी हो चुकी प्रमुख स्मार्ट सिटी परियोजनाएं:
इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC): ₹333.61 करोड़

24×7 जलापूर्ति (मनीमाजरा – पायलट प्रोजेक्ट): ₹166.06 करोड़

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का अपग्रेडेशन: ₹738.91 करोड़

इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS): ₹41.91 करोड़

LED स्ट्रीट लाइट्स: ₹55.00 करोड़

पब्लिक बाइक शेयरिंग योजना: ₹20.06 करोड़

24×7 जलापूर्ति (पैन सिटी): ₹60.77 करोड़

निष्कर्ष
स्मार्ट सिटी मिशन भले ही अपने अंतिम चरण में हो, लेकिन इससे जुड़ी SPV कंपनियों की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। केंद्र सरकार अब इन्हें शहरी विकास का स्थायी भागीदार बनाना चाहती है, ताकि स्मार्ट प्रोजेक्ट्स से निकला अनुभव देश के दूसरे शहरी सुधार कार्यक्रमों में भी लाभकारी साबित हो सके।