भाजपा ने आगामी कई राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए नई रणनीति बनाई है। नई रणनीति में अमित शाह के लिए अलग से प्लान तैयार किया गया है। भाजपा की चुनाव प्रचार रणनीति के तहत केंद्रीय गृह मंत्री अब हर महीने दो-दो दिन बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में बिताने वाले हैं। ये दौरे तीनों राज्यों में विधानसभा चुनाव होने तक जारी रहेंगे, जिसमें पार्टी पूरी ताकत से मोर्चा संभालने के लिए प्रतिबद्ध है।
चुनावी मोड में आए अमित शाह
शुक्रवार को संसद सत्र के समापन के बाद अमित शाह ने तुरंत अपना चुनावी मिशन शुरू कर दिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अप्रैल से वे हर महीने तीनों राज्यों का दौरा करेंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शाह बिहार के नेताओं के साथ पार्टी की चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए 30 अप्रैल और 1 मई को राज्य के दौरे पर रहेंगे।
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बंगाल के लिए विशेष तैयारी
पश्चिम बंगाल में भी वह हर महीने दो दिन बिताएंगे, जिसकी शुरुआत 14 और 15 अप्रैल को होगी। तमिलनाडु में उनका दौरा 10 और 11 अप्रैल को होगा। अपने दौरे के दौरान वे चेन्नई में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे और भाजपा की चुनावी तैयारियों का जायजा लेंगे।
अमित शाह बातचीत में हाल के घटनाक्रमों और गठबंधनों को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी चर्चा करेंगे। सूत्रों ने बताया कि चेन्नई में वे भाजपा नेताओं और राज्य में एनडीए गठबंधन के सहयोगियों से मुलाकात करेंगे।
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बिहार विधानसभा चुनाव अक्तूबर-नवंबर में होना है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अगले साल मार्च-अप्रैल में असम, केरल और पुडुचेरी के साथ चुनाव होने की संभावना है। बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में भाजपा सबसे बड़ी सहयोगी है। इस गठबंधन में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) शामिल हैं। जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार करीब 20 साल से राज्य के मुख्यमंत्री हैं। भाजपा हालांकि, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में एक अलग तरह की चुनौती का सामना कर रही है।
तमिलनाडु में फिर थाम सकती है अन्नाद्रमुक का दामन
तमिलनाडु में हमेशा एक हाशिये पर रहने वाली भाजपा से उम्मीद की जा रही है कि वह राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के साथ अपने गठबंधन को पुनर्जीवित कर सकती है, ताकि दक्षिणी राज्य में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले ‘इंडिया’ गठबंधन को टक्कर दी जा सके। द्रमुक का 2021 से ही राज्य की सत्ता पर दबदबा रहा है।