Sirsa Smart City Mission 100 City Not Made Sirsa MP Kumari Selja 48 Thousand Crore Expenditure Plan Stopped Public Misguide | सैलजा-स्मार्ट सिटी के नाम पर जनता को किया गुमराह: सांसद बोली- सरकार ने योजना को किया बंद; दावा 48 हजार करोड़ खर्चा – Sirsa News

अखिल भारतीय कांग्रेस की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार योजनाओं के नाम पर देश की जनता को गुमराह करती आई है। पहले कहा गया कि देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा, जिसमें

प्रदेश सरकार ने हाल में घोषणा की थी कि सात शहरों को भी स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा तो दूसरी ओर सांसद द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री तोखन साहू ने संसद में स्पष्ट कहा कि अब इस योजना 04 मार्च 2025 तक ही थी। देश के चुने गए 100 शहर तो स्मार्ट सिटी बन नहीं पाए। सरकार दावा कर रही है कि इस योजना पर 48000 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि यूपीए सरकार में शहरों के सुमचित विकास को लेकर जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन के नाम से योजना शुरू की गई थी। बाद में मोदी सरकार ने इस योजना का नाम स्मार्ट सिटी मिशन कर दिया।

इसका उद्देश्य शहरों को बेहतर बुनियादी सुविधाओं और स्मार्ट समाधानों से लैस करना है, जिससे नागरिकों का जीवन स्तर सुधर सके और शहर स्वच्छ व टिकाऊ बनें। शहरों को स्मार्ट बनाने के लिए बुनियादी ढांचे और सेवाओं में सुधार करना, जिससे नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर मिले। इसके लिए केंद्र सरकार शहरों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

स्मार्ट सिटी देश में कितने शामिल किए

स्मार्ट सिटी मिशन को लेकर सांसद कुमारी सैलजा ने आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय से पूछा- क्या आवास एवं शहरी कार्य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि स्मार्ट सिटी मिशन की शुरूआत का समय और देश में अब तक शामिल किए गए।

शहरों की संख्या तथा राज्यवार आवंटित धनराशि हरियाणा में शहरवार स्वीकृत, जारी और उपयोग की गई धनराशि का ब्यौरा क्या है और सरकार के पास हरियाणा के अन्य शहरों को भी उक्त मिशन के अंतर्गत लाने की कोई योजना है और इसका ब्यौरा क्या है।

कुल 48 हजार करोड़ रुपए का परिव्यय रखा इन सवालों के उत्तर में 27 मार्च को आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि स्मार्ट सिटीज मिशन (एससीएम) 25 जून 2015 को लाँच किया गया था। केंद्र सरकार ने एससीएम के तहत शामिल 100 शहरों के लिए कुल 48,000 करोड़ रुपए का परिव्यय रखा है।

यह योजना 04 मार्च 2025 तक है हरियाणा से एससीएम के तहत चुने गए फरीदाबाद और करनाल नामक दो शहर 980 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता का दावा करने में सक्षम रहे हैं, जिनमें से 844 करोड़ रुपये का उपयोग किया जा चुका है।

स्मार्ट सिटी नहीं बने तो योजना को कर दिया बंद

कुमारी सैलजा ने कहा है कि देश के 100 शहर जिन्हें स्मार्ट सिटी बनाए जाने के लिए 48000 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई। वे शहर आज तक स्मार्ट सिटी तो नहीं बने। इसके बजाय इस योजना बंद कर दिया गया। एक तरह से सरकार ने इस योजना के नाम पर पैसा पानी में बहा दिया।

इस मिशन के तहत जितनी धनराशि केंद्र देता था, उतनी ही राशि राज्य भी लगाता था। दोनों ही सरकारों ने इसकी कभी समीक्षा ही नहीं की कि पैसा सही जगह लग रहा है या नहीं।

इन जिलों को स्मार्ट सिटी बनाने की थी घोषणा

उधर हरियाणा सरकार ने हिसार, पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, पानीपत, रोहतक और सोनीपत को भी स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की थी। कुमारी सैलजा ने कहा कि केंद्र को इस स्मार्ट सिटी मिशन को लेकर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए, ताकि जनता को भी पता चल सके कि स्मार्ट सिटी के नाम पर कौन सा खेल खेला गया।