07 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
International Desk: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: अब तक क्या हुआ, ट्रंप क्यों भड़के, और आगे की राह क्या है? भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को लेकर कई महीनों से बातचीत चल रही थी, लेकिन अंत में यह डील अधर में लटक गई। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% आयात शुल्क लगाने का ऐलान कर दिया, जो 7 अगस्त (अमेरिकी समयानुसार) से लागू हो गया है। इसके अलावा 27 अगस्त से अतिरिक्त 25% शुल्क भी लागू किया जाएगा, जिससे कुछ भारतीय उत्पादों पर कुल टैरिफ 50% तक पहुंच सकता है।
बातचीत की शुरुआत और प्रगति
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता फरवरी 2025 में शुरू हुई थी, यानी ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के एक महीने के भीतर ही। शुरुआत से ही दोनों देशों ने इसे प्राथमिकता दी और पांच दौर की बातचीत की गई। अप्रैल में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस भारत आए और मसौदे को अंतिम रूप दिया गया था।
भारत की तरफ से अमेरिका को कई अहम प्रस्ताव दिए गए:
अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों पर टैरिफ नहीं लगाने की पेशकश
एल्कोहल और अमेरिकी कारों पर टैरिफ में कटौती की सहमति
25 अरब डॉलर की ऊर्जा और हथियार खरीद का भरोसा, जिससे अमेरिका का 45 अरब डॉलर का व्यापार घाटा कम किया जा सके
फिर भी क्यों नहीं बनी बात?
हालांकि पांचवीं बैठक तक दोनों पक्षों के मतभेद काफी हद तक सुलझ चुके थे, और ट्रंप ने ‘बड़ा समझौता’ होने की बात कही थी, लेकिन अंतिम वक्त में वे पीछे हट गए। इसकी कुछ बड़ी वजहें रहीं:
अमेरिका को जापान, वियतनाम, इंडोनेशिया और यूरोपीय संघ से अपेक्षाकृत बेहतर डील मिल गई थी ट्रंप भारत से भी उसी स्तर की रियायतें चाहते थे, लेकिन भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर की रक्षा के लिए सीमाएं तय की थीं
भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को लेकर ट्रंप की ओर से बार-बार “मध्यस्थता” का दावा किया गया, जिसे भारत ने खारिज कर दिया—इससे भी रिश्तों में खटास आई
भारत की पेशकशें और अमेरिका की अपेक्षाएं
भारत ने बातचीत में:
10% बेसिक टैरिफ हटाने का प्रस्ताव दिया
स्टील, एल्युमिनियम, और ऑटो सेक्टर पर अमेरिकी टैरिफ हटाने की मांग की
अन्य देशों की तरह 15% टैरिफ रेट पर डील करने की कोशिश की
लेकिन अमेरिका चाह रहा था:
ज्यादा बाज़ार तक पहुंच
निवेश के बेहतर अवसर
कृषि और डेयरी सेक्टर में रियायतें
ट्रंप आखिर में क्यों भड़के?
व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप अन्य देशों से मनमाफिक समझौते करके आत्मविश्वास में आ गए थे और भारत से भी उसी तरह की डील चाहते थे। लेकिन भारत की सीमित रियायतें उन्हें स्वीकार्य नहीं थीं।
इसके अलावा ट्रंप का भारत-पाक संघर्ष में मध्यस्थता का दावा और भारत की ओर से इसका खंडन, संबंधों में तनाव का कारण बना।
आगे की राह
हालांकि ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ लागू कर दिए हैं, लेकिन अगस्त के मध्य में एक और बातचीत का दौर संभावित है। इसमें:
भारत कृषि और डेयरी क्षेत्र में कुछ रियायतें दे सकता है
अमेरिका से ऊर्जा खरीद बढ़ाने पर सहमति बन सकती है
पूर्व अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि मार्क लिंसकॉट के अनुसार, समझौते की संभावनाएं अभी भी जिंदा हैं। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधी बातचीत से समाधान निकाला जा सकता है।
निष्कर्ष
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता संभव था, लेकिन अंतिम क्षणों में राजनीतिक मतभेद और अपेक्षाओं का टकराव डील पर भारी पड़ा। अब नजरें अगस्त मध्य की संभावित बातचीत पर हैं, जिससे इस गतिरोध को खत्म किया जा सके। यदि दोनों पक्ष लचीलापन दिखाते हैं, तो समझौते की नई उम्मीद बन सकती है।