150 Years of Vande Mataram: 1875 की एक रचना कैसे बनी भारत का राष्ट्रीय गीत—स्वतंत्रता संग्राम से संविधान सभा तक का सफर

150 Years of Vande Mataram: 1875 की एक रचना कैसे बनी भारत का राष्ट्रीय गीत—स्वतंत्रता संग्राम से संविधान सभा तक का सफर

08 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आज संसद के दोनों सदनों में विशेष चर्चा आयोजित की जा रही है, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से होगी। सात नवंबर 1875 को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखी गई यह रचना पहली बार बंगदर्शन में प्रकाशित हुई थी और बाद में 1882 में उनके उपन्यास आनंदमठ का हिस्सा बनी। रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया और 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया गया।

1905 के स्वदेशी आंदोलन में यह गीत ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ प्रतिरोध का सबसे शक्तिशाली नारा बना। विद्यार्थियों, क्रांतिकारियों और प्रवासी भारतीयों ने इसे स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक मानकर अपनाया। संविधान सभा ने 1950 में सर्वसम्मति से वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत घोषित किया और इसे जन गण मन के समान सम्मान दिया।

इसके 150वें वर्ष पर देशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दिल्ली में राष्ट्रीय समारोह, डाक टिकट और स्मारक सिक्के जारी होंगे, जबकि विदेशों में भारतीय दूतावास ‘वंदे मातरम: सैल्यूट टू मदर अर्थ’ थीम पर सांस्कृतिक आयोजन करेंगे। यह गीत आज भी भारत की एकता, संस्कृति और राष्ट्रभावना का सशक्त प्रतीक बना हुआ है।