जलसे की जमात में बैठे मुस्लिम समाज के लोग
हरियाणा के नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका शहर में शनिवार से तब्लीगी जलसे की शुरुआत हो चुकी है। सुबह से ही लोगों का कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने का सिलसिला जारी है जो पूरी रात तक चलेगा। तीन दिवसीय इस जलसे का समापन 21 अप्रैल को होगा। इस जलसे में मौलाना साद स
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21 एकड़ से अधिक भूमि में टेंट लगाया गया
जलसे के लिए फिरोजपुर झिरका में 21 एकड़ से अधिक भूमि में टेंट लगाया गया है, तो करीब 100 एकड़ भूमि में शौचालय, पार्किंग, वजू खाना, मेडिकल से लेकर तमाम इंतजाम किए गए हैं।

जलसे में पहुंच रहे लोग
कुछ पुलिसकर्मी और 1000 से अधिक तब्लीगी जमात के वालंटियर व्यवस्था को सुचारू रूप से अंजाम दे रहे हैं। हालांकि पुलिस कर्मचारी जलसे के अंदर दिखाई नहीं दिए हैं,लेकिन बाहर यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए तैनात है। इस कार्यक्रम में हिंदू समाज के लोगों ने ना केवल जलसा स्थल के लिए फ्री में जमीन दी, बल्कि ट्यूबवेल से छिड़काव, पीने के पानी का इंतजाम और वजू खाने के लिए पानी पहुंचाने तक का भी इंतजाम किया।
10 से 15 लाख लोगों के आने की उम्मीद
इसके अलावा लाखों रुपये की आर्थिक मदद भी हिंदू समाज के लोगों ने की है। जलसा के प्रेस प्रवक्ता अख्तर अल्वी ने बताया कि इस कार्यक्रम में 10 से 15 लाख लोगों के आने की उम्मीद है। पूरा काम उनके वालंटियर द्वारा संभाला जा रहा है। इस आयोजन में मंच से कोई राजनीतिक बात बिल्कुल नहीं होगी।

जलसे में पहुंच रहे लोग
सिर्फ मुस्लिम समाज के बीच पहले सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए पूरी कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की उन्हें सहायता मिल रही है। जिसमें फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की गाड़ियों को भी यहां खड़ा किया गया है। सूत्रों की माने तो इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए राज्य व केंद्र सरकार का खुफिया विभाग भी पूरी तरह से सक्रिय दिखाई दे रहा है।
अंतिम दिन मुल्क की शांति के लिए कराई जाएगी दुआ
अख्तर अल्वी ने बताया कि जलसे के अंतिम दिन मुल्क की अमन शांति व तरक्की के लिए दुआ कराई जाती है। सबसे ज्यादा भीड़ अंतिम दिन 21 अप्रैल को होगी, क्योंकि दुआ के लिए बड़ी तादाद में लोग जलसे में शिरकत करते हैं। मुस्लिम समाज के लोग यही कोशिश करते हैं कि कुदरत उनकी बुराइयों को माफ कर देगा और वह सही रास्ते पर चल पड़ेंगे। जलसा स्थल पर आने-जाने के लिए चारों तरफ से रास्ते बनाए गए हैं। पार्किंग की भी उचित व्यवस्था की गई है, ताकि जलसा के दौरान या समाप्ति के बाद जाम जैसी स्थिति पैदा ना हो।











