08 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Haryana Desk: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में 4.64 लाख बच्चों ने बीच में छोड़ी पढ़ाई, गरीबी और संसाधनों की कमी बनी बड़ी वजह देशभर में शिक्षा में सुधार के प्रयासों के बावजूद स्कूली बच्चों के बीच ड्रॉपआउट की दर एक गंभीर चिंता बनी हुई है। हरियाणा में सत्र 2023-24 के दौरान सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से 11वीं तक पढ़ने वाले लगभग 4 लाख 64 हजार छात्रों ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत के बराबर और पंजाब से दोगुना है।
हरियाणा में माध्यमिक स्तर (कक्षा 9वीं और 10वीं) पर हर 100 में से 14 छात्र पढ़ाई छोड़ रहे हैं, जो कि राष्ट्रीय औसत 14.1% के करीब है। वहीं, प्राथमिक स्तर पर यह दर 1.2% और अपर प्राइमरी पर 4.7% रही है, जो पंजाब की तुलना में ज्यादा है। पंजाब में यह दर क्रमशः 0.1% और 2.6% है।
क्यों हो रहे बच्चे पढ़ाई से बाहर?
1. गरीबी और आर्थिक बोझ:
अपर प्राइमरी के बाद कई गरीब परिवार बच्चों की पढ़ाई का खर्च नहीं उठा पाते, खासकर निजी स्कूलों में फीस और किताबों का बोझ भारी पड़ता है।
2. बुनियादी ढांचे और परिवहन की कमी:
ग्रामीण इलाकों में स्कूलों की दूरी और सुरक्षित परिवहन की कमी के चलते खासकर लड़कियां पढ़ाई छोड़ने को मजबूर होती हैं।
3. शिक्षकों की कमी:
बहुत से सरकारी स्कूलों में शिक्षक संख्या पर्याप्त नहीं है, जिससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाती।
4. प्रवासी परिवार:
हरियाणा में हर साल अन्य राज्यों से हजारों कामगार परिवार आते हैं, जिनके बच्चे स्कूल में दाखिल तो होते हैं, लेकिन कुछ समय बाद फिर से दूसरे राज्य चले जाते हैं। इससे नियमितता टूटती है और बच्चे ड्रॉपआउट हो जाते हैं।
सरकार की पहल
हरियाणा सरकार ने ड्रॉपआउट रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं:
हर 20 किलोमीटर पर कॉलेज खोलने की योजना।
छात्राओं को मुफ्त परिवहन सुविधा और फीस माफी।
शिक्षा विभाग द्वारा 6 से 18 वर्ष के बच्चों की ट्रैकिंग।
ऐसे बच्चों की पहचान जो किसी स्कूल, गुरुकुल या मदरसे में नामांकित नहीं हैं, और उन्हें फिर से स्कूल से जोड़ने का प्रयास।
शिक्षा मंत्री का बयान
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि इस बार सरकारी स्कूलों में बच्चों का रुझान बढ़ा है और ड्रॉपआउट दर में गिरावट आई है। शिक्षक भी घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल में दाखिला लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अभी इस दिशा में और काम करने की जरूरत है और सरकार इसके लिए लगातार प्रयास कर रही है।
निष्कर्ष
हरियाणा में ड्रॉपआउट की समस्या अभी भी चुनौती बनी हुई है, लेकिन सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा उठाए गए कदम धीरे-धीरे असर दिखा रहे हैं। ज़रूरत है कि इन प्रयासों को और सुदृढ़ किया जाए ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए।













