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31/March/2025 Fact Recorder

5. पूर्णिया

बिहार के पूर्णिया प्रमंडल में चार जिले- अररिया, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया जिले आते हैं। इनमें कुल 24 सीटें हैं। सबसे ज्यादा छह सीटें अररिया जिले में हैं, जबकि चार सीटें किशनगंज, सात सीटें कटिहार और सात सीटें पूर्णिया जिले में हैं। आइये जानते हैं यहां तीन चुनावों का इतिहास…

(i). 2020 का चुनाव

2020 के विधानसभा चुनाव में पूर्णिया को अपना गढ़ साबित करते हुए भाजपा ने यहां 8 सीटें हासिल कीं। वहीं, जदयू को यहां 4 सीटें मिलीं। इस तरह पूर्णिया प्रमंडल की आधी सीटें यानी 12 सीटें एनडीए के खाते में गईं। एनडीए को अररिया, कटिहार और पूर्णिया तीनों में ही चार-चार सीटें मिलीं।

दूसरी तरफ महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद को इस पूरे प्रमंडल में सिर्फ एक किशनगंज जिले की सीट मिली। उससे ज्यादा सीटें महागठबंधन की साथी पार्टी कांग्रेस को मिली, जिसके पांच उम्मीदवार जीत गए। इनके अलावा एआईएमआईएम को पांच और कम्युनिस्ट पार्टी (एम-एल) को एक सीट से संतोष करना पड़ा।

(ii). 2015 का चुनाव

2015 के चुनाव में राजद-जदयू और कांग्रेस के साथ आने की वजह से भाजपा को यहां नुकसान हुआ था। पार्टी को यहां छह सीटें मिलीं। अररिया, पूर्णिया और कटिहार में पार्टी को दो-दो सीटें मिलीं। उधर महागठबंधन के लिए पूर्णिया प्रमंडल की सबसे बड़ी पार्टी बनी कांग्रेस, जिसे आठ सीटें हासिल हुईं। वहीं, राजद को तीन सीटें मिलीं। जबकि जदयू को जो छह सीटें मिलीं, उनमें अररिया, किशनगंज और पूर्णिया जिले की दो-दो सीटें रहीं।

(iii). 2010 का चुनाव

2010 के चुनाव में एनडीए का जलवा पूर्णिया में भी देखने को मिला। भाजपा ने यहां की 24 में से 13 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि जदयू को चार सीटें मिलीं। इस तरह अकेले भाजपा ने 50 फीसदी से ज्यादा सीटें हासिल कर लीं। वहीं, विपक्षी दल राजद को इस प्रमंडल में सिर्फ एक सीट ही मिली। उधर राजद की गठबंधन की साथी लोजपा को दो सीटें मिलीं। कांग्रेस को तीन और एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी को मिली।