गुरुग्राम में 82 करोड़ का रियल एस्टेट घोटाला: ईडी ने ‘अंसल हब-83’ प्रोजेक्ट की संपत्तियां कीं अटैच, जांच तेज

20 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Haryana Desk:  गुरुग्राम में एक बड़े रियल एस्टेट घोटाले का खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत कार्रवाई करते हुए सेक्टर-83 स्थित कमर्शियल प्रोजेक्ट ‘अंसल हब-83’ से जुड़ी करीब 82 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को प्रोविजनली अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई निवेशकों से कथित धोखाधड़ी और अवैध तरीके से धन जुटाने के मामले में की गई है।

बिना वैध मंजूरी के बेची गईं यूनिट्स
ईडी की जांच में सामने आया है कि करीब ढाई एकड़ भूमि पर फैले इस प्रोजेक्ट में 147 कमर्शियल दुकानें, 137 ऑफिस स्पेस और दो रेस्टोरेंट यूनिट्स शामिल हैं। आरोप है कि प्रोजेक्ट को जरूरी वैधानिक और कानूनी मंजूरियां मिलने से पहले ही निवेशकों को यूनिट्स बेच दी गईं। इससे बड़ी संख्या में निवेशक ठगी का शिकार हुए।

2023 में दर्ज हुई थी FIR
इस मामले में जून 2023 में गुरुग्राम पुलिस ने धोखाधड़ी से जुड़ी धाराओं के तहत मेसर्स अंसल हाउसिंग लिमिटेड (पूर्व में अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड) के प्रमोटर्स और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। कंपनी के फुल-टाइम डायरेक्टर कुशाग्र अंसल के अलावा इससे जुड़ी कंपनियां मेसर्स सम्यक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स आकांक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड भी जांच के दायरे में हैं।

निवेशकों की शिकायत से शुरू हुई जांच
ईडी की जांच की शुरुआत हब-83 अलॉटी वेलफेयर एसोसिएशन की शिकायत पर हुई थी, जो एक हजार से अधिक निवेशकों का प्रतिनिधित्व करती है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि निवेशकों को झूठे आश्वासन, वर्ल्ड-क्लास सुविधाओं और समय पर पजेशन के वादों के जरिए प्रोजेक्ट में निवेश के लिए प्रेरित किया गया।

लाइसेंस खत्म, फिर भी वसूली जारी
जांच में यह भी सामने आया कि प्रोजेक्ट का लाइसेंस दिसंबर 2015 में समाप्त हो गया था, लेकिन इसके बावजूद बिना लाइसेंस रिन्यू कराए सितंबर 2023 तक यूनिट्स की बिक्री और धन संग्रह जारी रखा गया। कई निवेशकों ने हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) में भी देरी से पजेशन, अधूरे निर्माण और अवैध धन संग्रह को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं।

15 साल बाद भी न पजेशन, न ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट
निवेशकों को समय पर पजेशन और आधुनिक सुविधाओं का वादा किया गया था, लेकिन लगभग 15 वर्षों के बाद भी न तो ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी हुआ और न ही यूनिट्स का पजेशन मिला। ईडी की जांच में यह तथ्य सामने आया कि 2011 से 2023 के बीच निवेशकों से करीब 82 करोड़ रुपये जुटाए गए, जिनका उपयोग प्रोजेक्ट पूरा करने के बजाय अन्य कार्यों और निजी लाभ के लिए किया गया।

संपत्तियों के ट्रांसफर पर रोक
ईडी ने प्रोजेक्ट की भूमि और अब तक किए गए निर्माण को प्रोविजनली अटैच कर दिया है, ताकि किसी भी तरह का ट्रांसफर, बिक्री या निस्तारण न किया जा सके। एजेंसी ने साफ किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है।
ईडी का कहना है कि वह आर्थिक अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है और इस पूरे मामले में धोखाधड़ी के शिकार निवेशकों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।