{“_id”:”67e7ffe25bcf2d59020b8c76″,”slug”:”khabron-ke-khiladi-religious-orthodoxy-festivals-expert-analysis-social-media-effect-news-2025-03-29″,”type”:”feature-story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”Khabron Ke Khiladi: त्योहार क्यों बने धार्मिक कट्टरता दिखाने का जरिया? खबरों के खिलाड़ी ने बताई पीछे की सियासत”,”category”:{“title”:”India News”,”title_hn”:”देश”,”slug”:”india-news”}}

खबरों के खिलाड़ी।
– फोटो : अमर उजाला
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देश में त्योहारों का मौसम है। होली, रमजान के बीच नवरात्रि की शुरुआत होने को है। इन सबके बीच अलग-अलग संगठनों की बयानबाजी सियासी सुर्खियां बटोर रही है। कभी मस्जिद ढंकने की बात होती है तो कभी नवरात्र में मीट की दुकानें बंद करने के लिए कहा जाता है। हर त्योहार से पहले इस तरह की कट्टरता के पीछे क्या सियासत हो रही है? नेताओं के बयान क्या एक सोची समझी रणनीति तहत दिए जाते हैं? इन्हीं सवालों पर इस हफ्ते के ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी और अवधेश कुमार मौजूद रहे।
समीर चौगाओनकर: भारत दुनिया का इकलौता ऐसा देश होगा जहां इतने ज्यादा त्योहार हैं। भारत में हर महीने कोई न कोई त्योहार होता है। कुछ समय से त्योहारों पर राजनीति होने लगी है। समाज में इससे वैमनस्यता बढ़ती जा रही है। सोशल मीडिया ने भी इसे बढ़ाने का काम किया है। समाजिक संगठन जिस तरह से दूसरे समाज के खिलाफ बयान देते हैं, उससे भी कड़वाहट बढ़ती है। इसे एक बहुत बुरे दौर के रूप में देखता हूं। अब समाज को सोचना होगा कि इस खाई को बढ़ने से रोकना है। राजनीतिक दल इस खाई को बढ़ाने में लगे हैं। जनता को भी सोचना होगा कि देश किस दिशा में ले जाना है। उसे भी इस तरह से समाजिक संगठनों के खिलाफ बड़े आंदोलन की जरूरत है।











