अमेरिका के सहयोगी देश यमन पर हमले की योजना की चर्चा कर रहे अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों की लीक हुई ग्रुप चैट को एक चौंकाने वाली सुरक्षा चूक मान रहे हैं। इस चैट में गलती से एक पत्रकार को भी जोड़ा गया था। इस घटना के बाद यूरोपीय देशों में अब वॉशिंगटन के साथ खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त सैन्य अभियानों की सुरक्षा पर शक पैदा हो गया है।
वॉशिंगटन के यूरोपीय सहयोग इसे भयावह और लापरवाह कदम मान रहे हैं। एक यूरोपीय राजनयिक ने कहा कि यह एक गंभीर सुरक्षा चूक है, जिससे अमेरिका के साथ खुफिया जानकारी साझा करने पर संदेह पैदा हो सकता है। रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के सुरक्षा विशेषज्ञ नील मेल्विन ने इसे बेहद हैरान करने वाली घटना बताया। उन्होंने कहा, यह अमेरिका के उच्च पदस्थ अधिकारियों की ओर से सामान्य सुरक्षा नियमों की पूरी तरह से अनदेखी करने जैसा है।
लीक हुई टैच से सुरक्षा को लेकर चिंताएं तो बढ़ी ही, साथ ही अमेरिकी अधिकारियों ने अपने यूरोपीय सहयोगियों को नजरअंदाज भी किया। उप राष्ट्रपति जे.डी.वेंस ने यूरोप को बार-बार मदद देने पर नारजगी जताई, जब रक्षा मंत्री पट हेगसेथ ने यूरोप को कमजोर और मुफ्तखोर कहा।
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यह आलोचना अमेरिका और यूरोप के संबंधों के लिए एक और झटका है, जो पहले से ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति और सहयोगियों की अनदेखी से कमजोर हो चुके हैं। मेल्विन ने कहा कि अमेरिका के सहयोगियों के लिए यह नई खतरे की घंटी नहीं है। यह पहले से ही बज रही है। हालांकि यूरोपीय अधिकारी सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि अमेरिका के साथ उनके संबंध मजबूत हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्र के प्रवक्ता डेव पारेस ने कहा, सुरक्षा, रक्षा और खुफिया मामलों में अमेरिका हमारा करीबी सहयोगी है और यह संबंध आगे भी बना रहेगा। वहीं, फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने कहा, अमेरिका हमारा सहयोगी और फ्रांस वॉशिंगटन के साथ-साथ अपने अन्य सहयोगियों और यूरोपीय साझेदारों के साथ मिलकर सुरक्षा सहित मौजूदा चुनौतियों का सामना करता रहेगा।
दूसरी बार सत्ता में आने के बाद ट्रंप प्रशासन ने दुनिया भर में लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाले सरकारी कार्यक्रमों की फंडिग रोक दी और बाहरी लोगों के प्रति सख्त रुख अपनाया। अमेरिका के दूतावासों ने 17 देशों में चेतावनी जारी की है कि अगर किसी आगंतुक का व्यवहार सरकार के नियमों के खिलाफ पाया गया तो उसे देश से निकाला जा सकता है। ट्रंप की सख्त नीतियों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिसके बाद कई यूरोपीय देशों ने अपने लोगों को अमेरिका की यात्रा के दौरान सतर्कता बरतने की सलाह दी।
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